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पंजाब के बड़े किसानों का आंदोलन अब दम तोड़ रहा है

 




 

दिल्‍ली: पंजाब के बड़े किसानों का आंदोलन अब दम तोड़ रहा है। किसानों ने घोषणा की है कि वे अपना भारत बंद ११ बजे शुरु करेंगे और ३ बजे बंद कर देंगे। लोग कार्यालय जा और आ सकेंगे। वे कहते हैं कि वे आम लोगों की समस्‍या को देखते हुए वे ऐसा निर्णय ले रहे हैं। 

यदि सचमुच उन्‍हें चिंता होती तो वे इस तरह का आंदोलन नहीं करते। वे दिल्‍ली की जनता को बंधक बनाने का काम नहीं करते।

 

१२ दिनों से यह किसान आंदोलन चल रहा है और इसकी वजह से राष्‍ट्रीय राजमार्ग बंधक बना हुआ है। इस आंदोलन में पूरी तरह से पोलिटिकल मोटिव है। वे किसानो के मुद्दे पर किसानों के विरुद्ध खड़े हैं। यह बात देश की जनता को समझ में आने लगी है। वे इस पर स्‍पष्‍ट प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

अभी एक रस्‍साकशी चल रही थी। विपक्ष के नेताओं के अपने कहे हुए का पर्दाफास हो रहा है। भारत बंद के अपने अभियान में वे हार मान गये।

अब उनकी हताशा दिखई देती है। उनकी निराशा दिखई देती है। उनको अब लग गया है कि मुद्दा गलत पकड़ लिया। अब उन्‍हें लग गया कि इस किसान आंदोलन में किसान ही उनके साथ नहीं है। 

 

आम किसान कहते हैं भैया, ये तमाशा बंद करो

 

वे जब वार्ता के लिए विज्ञान भवन जाते थे तो अपना खाना वाना लेकर जाते थे। आप ही बताइए उनका मनोविज्ञान।  असल किसान ऐसा नहीं होता है। वह न तो अपने यहां के अतिथि  को भोजन कराए बगैर स्‍वयं खाना नहीं खाता। आप जजमान का अपमान कर रहे हैं । आपसे कैसे कोई वार्ता हो सकती है। 

देश के दूसरे हिस्‍सों के किसान आश्‍चर्य करते हैं कि दिल्‍ली में वे कौन से फर्जी किसान हैं जो किसानों  के विरुद्ध आंदोलन कर रहे हैं।

समय अच्‍छा जा रहा है

समय अच्‍छा जा रहा है। आज संचार का माध्‍यम खुला है। समय से विपक्ष को भी जनता की प्रतिक्रिया समय से और सलीके से मिल जाती है। देश के किसानों को समझ आ गया है कि यह जो आंदोलन है, वह पंजाब के बड़े किसानों का आंदोलन है। मूलत: वे बिचोलिए हैं जो मंडियां चलाते हैं और साल में १६०० करोड़ रुपए बतौर मंडी टैक्‍स वसूलते हैं जो इनके जेब में जाता है।  इसमें कुछ हरियाणा, पूर्वी उत्‍तर प्रदेश, उत्‍तराखंड आदि के भारतीय किसान यूनियन के नेता गण शामिल हैं। 

 

जनता इस आंदोलन के साथ नहीं है।

जनता इस आंदोलन के साथ नहीं है। किसान इस आंदोलन के साथ नहीं है। देश का आम किसान पंजाब के बड़े किसानों के साथ नहीं है। देश भर से प्रतिक्रिया में आवाज आना शुरु हो गया कि कुछ भी होगा कल भारत बंद नहीं होगा।

इन हरियाणा, पूर्वी उत्‍तर प्रदेश, उत्‍तराखंड आदि के भारतीय किसान यूनियन के नेता गण का अपना कोई आधार नहीं रह गया है। उनकी कुछ राजनैतिक ताकत भी नहीं हैं।

 

भारतीय किसान संघ इस आंदोलन के खिलाफ है। उसने यह स्‍पष्‍ट कह दिया है कि वह भारत बंद के खिलाफ हैं। मुंबई की टैक्‍सी युनियन जो देश की सबसे बड़ी टैक्‍सी यूनियन मानी जाती है, उसने कह दिय कि बंद नहीं होगा।

 

जिस ममता बैनर्जी के भरोसे वे सोच रहे थे कि बंगाल में बंद सफल करा लेंगे, वहां त्रिणमूल कांग्रेस ने कहा है कि हम बंद के खिलाफ हैं। हम बंद नहीं होने देंगे।

 

अरविंद केजरीवाल के विशुद्ध नौटंकी के बावजूद सच सामने आ गया। दिल्‍ली सरकार ने यही तीनो कानून अपने राज्‍य में पारित करा लिए। वही केजरीवाल इस पंजाब के बडे किसानों और मंडी दारों को आंदोलन पर उकसा रहे हैं, उनके सेवादार बन गये हैं। उनके प्रतिनिधि राधव चड्डा केले बांट रहे हैं, उनको आंदोलन जारी रखने के लिए उकसा रहे हैं। उन्‍होंने सारे मंत्रियों को इस पुण्‍य काम में लगा दिया है।

 

यह पूरा विपक्ष इस आंदोलन का समर्थन कर रहा था। दिल्‍ली की आप सरकार इस आंदोलन का समर्थन कर रहा था।

 

भारत बंद करेंगे मगर प्रतीकात्‍मक करेंगे

अब किसान नेता कहने लगे हैं कि भारत बंद करेंगे मगर प्रतीकात्‍मक करेंगे। क्‍योंकि हमें आम आदमी की समस्‍या का ख्‍याल है। इस लिए हम प्रतीकात्‍मक भारत बंद का आयोजन करने जा रहे हैं।

 

लेकिन यह सच नहीं है। विभिन्‍न राजनैतिक दलों के नेता कोशिश करके भी आम किसानों को अपने साथ नहीं जोर पा रहे हैं। उनके अपने कार्यकर्ता गण अपने नेताओं के साथ खड़े रहने को तैयार नहीं हैं। 

 

९ दिसंबर को फिर से किसान नेताओं को बातचीत के टेबल पर बैठना है। इन आंदोलनकारियों का एटीच्‍यूड गलत है। इन्‍होंने आम जन जीवन को अस्‍त व्‍यस्‍त कर दिया है।

 

देश के आम किसान अब जागरुक हो गये हैं

देश के आम किसान अब जागरुक हो गये हैं। जनता समझती है। अब कोई उनको ब्‍लैकमेल नहीं कर सकता है।   

पूरा विपक्ष एक साथ आ गया था कि इस अंदोलन को मिलकर हवा दें । मगर पूरा खेल ही उलट गया। देश के आम किसानों ने समझ लिए कि इसमें राजनीति हो  रही है इसका किसान हित से कुछ लेना देना नहीं है।

 

दिल्‍ली पुलिस की तरफ से स्‍पष्‍ट कहा गया है कि कोई भी यदि जबरदस्‍ती दुकान बंद कराएगा तो उसके साथ पुलिस कड़ाई से निपटेगी।

 

मुंबई की बसें चलती रहेगी। टैक्‍सियां चलती रहेगी।

मुंबई की बसें चलती रहेगी। टैक्‍सियां चलती रहेगी। यह समय अच्‍छा है कि सामान्‍य लोगों की जागरुकता बेहतर है। वे समझदार हैं।

 

आज समय की यह ताकत है कि तुरंत प्रतिकिया आ जाती है। लोगों को नब्‍ज समझ में आ जाती है। यह बात भारतीय तंत्र में आस्‍था और विश्वास को बढावा देती है। हमारी संवैधानिक व्‍यवसथा मजबूत है। हमारा लोकतंत्र मजबूत है। इससे विश्‍वमंच पर भारत मजबूत है।

आंदोलन के नेताओं को अब कोई आशा है नहीं है।

 

 

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