मुबई: 10 फरवरी 2022: भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2022 को सुबह 11 बजे संसद में वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए केंद्रीय बजट पेश किया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने कार्यकाल का यह चौथा बजट पेश किया। सदन में पेपर लेस बजट पेश किया गया। इससे पहले सीतारमण ने 2021 में भी कागज रहित बजट पेश किया था। जो एक ऐतिहासिक कदम था। संसद में पेश किए जाने के बाद बजट 2022 दस्तावेज केंद्रीय बजट मोबाइल एप पर भी उपलब्ध है।
स्वास्थ्य पर केंद्रित बजट
वित्त
मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया बजट 2022 बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य पर केंद्रित था। हालांकि इनकम टैक्स
स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। प्रौद्योगिकी विकास के लिए इस साल 5G के लिए स्पेक्ट्रम की नीलामी की जाएगी
और 5G को 2023 में रोल आउट किया जाएगा। सीतारमण ने एक केंद्रीय रूप से विनियमित
डिजिटल मुद्रा की भी घोषणा की, जिसे
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा पेश किया जाएगा। 2030 तक
280 गीगावॉट स्थापित सौर क्षमता के
महत्वाकांक्षी लक्ष्य के लिए घरेलू विनिर्माण की सुविधा के लिए, पॉलीसिलिकॉन से सौर पीवी तक पूरी तरह
से एकीकृत विनिर्माण इकाइयों को प्राथमिकता के साथ उच्च दक्षता वाले मॉड्यूल के
निर्माण के लिए उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन के लिए 19,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन किया
जाएगा।
यह बजट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बजट जरूर है मगर असल में यह प्रधान
मंत्री नरेंद्र मोदी का बजट है।
मैं
बजट के आंकड़ो की बात कभी बाद में करुंगा। अभी मैं बजट के राजनैतिक पक्ष की बात कर
रहा हूं। हर साल बजट आता है। अपने देश में चुनाव भी लगभग सलाना होता रहता है।
जो भी पार्टी केंद्र में सत्ता में होती है उसको एक प्रलोभन
होता है कि वह बजट प्रावधानों का इस्तेमाल वे अपने चुनावी हित के लिए करे। चुनाव
में अपनी स्थित बेहतर करने के लिए करे। बीजेपी के सामने भी था। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य का चुनाव था।
यूपी का चुनाव लोक सभा चुनाव के बाद सबसे महत्वपूर्ण चुनाव है।
यहां से लोकसभा चुनाव की दिशा तय होगी।
चुनाव प्रचार की शुरुआत करते हुए अमित शाह ने कहा था, कि अगर 2024 में मोदी को फिर से प्रधान मंत्री देखना चाहते हैं तो 2022 में यूपी
में योगी को जिताइए। पार्टी इससे ज्यादा महत्व क्या बता सकती है? जाहिर है कि 2022 के यूपी
चुनाव को बीजेपी कितनी अहमियत देती है।
सब
जानते हैं कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का अपना भी बोट बैंक है, जो
पाटी से अलग है। वह पार्टी के बोट के ऊपर
मिलता है। हम बार-बार यह देखते हैं कि राज्यों में जब चुनाव होते हैं, तो उसी
राज्य में हुए लोकसभा चुनाव में जो वोट मिले थे, वे उससे कम हो जाते हैं। उसकी एक ही वजह है कि जब प्रधानमंत्री
अपने लिए वोट मांगने जाते हैं तो उसका दायरा बढ़ जाता है। उनको वोट देने वाले
ज्यादा हैं, बीजेपी को वोट देने वाले अपेक्षाकृ कम
है। इसका एक ही मतलब है। उन राज्यों में भी, जहां बीजेपी का मजबूत संगठनिक जनाधार है, वहां भी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने नाम पर
अतिरिक्त बोट पड़ते हैं।
यह बात प्रधानमंत्र को पता है। लेकिन एक बात जो आज तक किसी
नेता में नहीं दिखी, वह है, चुनावी प्रलोभन
से इंकार करना। उससे बचना। और आगे के लिए सोचना। जबकि यह पता नहीं है कि आगे
रहेंगे कि नहीं। इसकी चिंता भी नहीं है।
यह बजट मोदी के आत्मविश्वास का बजट है
चिंता इस बात की है, कि जो हम कर रहे हैं, वह आगे आने वाले समय में, आगे की पीढ़ी के लिए, आज वर्तमान में जो लोग हैं, उनका भविष्य,
वो
सुरक्षित हो। यह बजट मेरी नजर में मोदी के आत्मविश्वास का बजट है। 35 परसेंट कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ाया गया है। इसका मूल
मंत्र यह है कि विकास दर बढ़ाओ। विकास में तेजी लाइए।
यह बजट विकास दर
को बढ़ाएगा। विकास में तेजी आएगी। उससे
रोजगार श्रृजन होगा। लोगों की आमदनी बढ़ेगी। उससे लोगों के जीवनस्तर में सुधार
होगा। उससे अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में बदलाव आएगा। इससे विकास की गति और तेज
होगी। ऐसा बजट है यह। 35 परसेंट कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ाया गया है। उसका मूल
मंत्र यह है कि विकास की गति तेज हो।
पेंडमिक के बावजूद जो एस्टीमेट आ रहे हैं, वे सकारात्मक
हैं। आरबीआई की बात कर लीजिए। इंटरनेशनल फंड की बात कर लीजिए। और बजट में जो
एस्टीमेट दिया गया है, उसकी बात
कर लीजिए। सब ८ से ९ फ़ीसदी की दर से भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास की बात कर रहे
हैं। इतने बड़े पेंडमिक के बावजूद। यह भरोसा, यह आत्मविश्वास नरेंद्र मोदी का ही था, जब सुपरीम
कोर्ट सवाल पूछ रहा था, तमाम दूसरे
लोग सवाल पूछ रहे थे कि वैक्सिन को लेकर। वे पूछ रहे थे कि कैसे एक साल के भीत इतने लोगों को वैक्सिन लगवा देंगे। यह तो चार पांच साल में भी नहीं हो सकता है।
तब भी डिगे नहीं मोदी। उनको विश्वास था कि यह में हासिल कर लेंगे। 78 परसेंट से ज्यादा आबादी को, जिनको लगना था वैक्सिन उनको दोनो डोज लग चुकी है। और लगभग 95 फ़ीसदी लोगों को सिगनल्ड लग चुकी है। यह कोई मामूली उपलब्धि
नहीं है। हम लोगों को शायद मोदी से अपेक्षा
ज्यादा रहती है। इसलिए ऐसी बातों को, ऐसी बड़ी उपलब्धियों को सामान्य मान कर चलते
हैं।
अगर प्रधानमंत्री चाहते, तो लोकलुभावन घोषणाएं कर सकते थे।
यह जो बजट है, उसमें अगर
प्रधानमंत्री चाहते, तो लोकलुभावन घोषणाएं कर सकते थे। नहीं किया। उसके बजाय उन्होंने स्थाई काम पर
जोड़ दिया। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 48000 करोड़ रुपए ग्रामीण
आवास के लिए रखे गए। इसमें 80 लाख
परिवारों को घर मिलेगा। औसतन एक परिवार में 5 लोग रहते हैं। इस तरह लगभग 4 करोड़ लोगों का घर मिलेगा।
नल से जल
जब यह सरकार आयी थी तो केवल 17 फीसदी घरों में नल था। लगभग 3 लाख घरों में नल से जल आता
था। पिछले दो सालों में 5 करोड़ से ज्यादा घरों में नल से जल पहुंचा है। इस साल के बजट में यह प्रावधान है कि 4 करोड़ से ज्यादा घरों में नल से जल पहुंचाया जाएगा।
जरा सोचिए कि अगर लोक लुभावन घोषणाएं हो जाती, कुछ इनकम टैक्स में थोड़ी राहत हो जाती, कुछ दूसरे टैक्सों में राहत हो जाती, वो ज्यदा बेहतर होता या यह ज्यादा बेहतर है जो लोगों के जीवन में आमूल
बदलाव लाए।
इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में इन्वेस्टमेंट
इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में जिस तरह का इन्वेस्टमेंट बढ़ाए
जा रहा है कि एक बड़े उद्योगपति ने कहा अगले 10 साल भारत में निवेश का महोत्सव होगा। यानी सरकार
खर्च बढ़ा रही है। अब प्राइवेट सेक्टर भी परेशानियों से निकल रहा है। बैंकिंग
सेक्टर को 7 साल लगे। लेकिन पटरी पर ले आई है सरकार।
उनके जो एनपीए थे, उनको ठीक किया। उसके बाद बैड बैंक बनाया। यह सब होने जा रहा है। रिजर्व
बैंक ऑफ इंडिया डिजिटल करेंसी शुरू करेगा। बहुत बड़ी क्रांति होने वाली है।
जिस तरह से व्यापार होता है, ज्यादा व्यापार, जो होलसेल
में होता है, वह सब डिजिटल करेंसी में आ जाएगा। एफिसिएंसी बढेगी। कॉस्ट कम होगा।
मगर ये सब छोटी बातें हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि भ्रष्टाचार कम होगा। भ्रष्टाचार
करने की, बेईमानी
करने की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाएगी।
5G का ऑप्शन 2022 में शुरू हो जाएगा। यह जो डिजिटाइजेशन हो रहा है, 5G जो शुरू होने जा रहा है। 2023 से सर्विस
शुरू हो जाएगी। 2025 तक सभी गांव में ब्रॉडबैंड की सेवा पहुंच जाएगी। उसका
मल्टीप्लायर इफेक्ट होगा। वह विकास के अनेक आयामों को बल देगा।
मोदी छोटी बात नहीं सोचते
मोदी छोटी बात नहीं सोचते। बार-बार एक बात अखबारों में उठाई
जाती है। मीडिया में पॉलिटिकल लोग उठा रहे हैं कि मिडिल क्लास जो टैक्स देता है, उसके बारे
में नहीं सोचा जा रहा है। मगर टैक्स तो सब लोग देते हैं। इनडायरेक्ट टैक्स जो जीएसटी है, वह हम सब
लोग देते हैं। ऐसा नहीं है कि मिडिल क्लास का योगदान कुछ कम है। उसको मैं कम करने
की कोशिश नहीं कर रहा हूं। मिडिल क्लास का बहुत बड़ा योगदान है। लेकिन सरकार की
समस्या यह है कि इनकम टैक्स रिटर्न तो सात आइ करोड़ लोग फाइल करते हैं। टैक्स
देने वाले लोग तो मुश्किल से ढाइ तीन करोड़ लोग हैं। उनको लाभ मिलना चाहिए मगर उसका दूसरा तरीका भी
है। उसको रास्ता दूसरा खोजा गया है। आपकी इनकम बढ़े। आपकी इनकम कैसे बढेगी। जब
देश की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ेगी। आपकी सैलरी बढ़ेगी। इंक्रीमेंट मिलेंगे। जिनके रोजगार गए हैं, उनको रोजगार मिलेगा। यह जो हो रहा है। जिस तरह से मैन्युफैक्चरिंग
को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इकोनोमी को कनजम्पशन बेस्ड से मैन्युफैक्चरिंग बेस्ड बनाने
की कोशिश
हमारे देश की इकोनोमी कनजम्पशन
बेस्ड है। यह अभी तक मैन्युफैक्चरिंग बेस्ड
नहीं था। उसको मैन्युफैक्चरिंग बेस्ड बनाने की कोशिश हो रही है। इसमें सबसे बड़ा
काम हुआ है पीएलआइ का प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव का। सरकार कंपनियों को इस बात का
प्रोत्साहन दे रही है कि अगर आप अपना प्रोडक्शन बढ़ाएंगे तो सरकार उसके लिए सरकार
आपको नगद प्रोत्साहन देगी। यह स्कीम इतनी सफल हुई है कि अब और क्षेत्रों से मांग
हो रही है कि इसको शुरू किया जाए। जिन क्षेत्रों में यह स्कीम चल रही है वहां से
डिमांड हो रही है इसका दायरा बढ़ाया जाय। इसका फायदा क्या है। निर्यात बढेगा। मगर
असली बात यह है कि इससे रोजगार बढ़ेगा।
सवाल रोजगार मिलने का है और रोजगार में लगातार बढ़ोतरी होने का है। वह टैक्स स्लैब में कटौती का नहीं है। आपकी
तनख्वाह बढ़ने का माहौल रहे। अगर कंपनी
अच्छा कर रही है, उसको
अच्छा प्रॉफिट हो रहा है तो अपने एम्पलाई को वह तरह-तरह के इंसेंटिव भी देती है।
इंक्रीमेंट किया जाता है। प्रमोशन दिया जाता है। तमाम सुविधाएं दी जाती है।
यह तभी होता है जब इकोनोमी ग्रो कर रही हो। इकोनोमी अगर नीचे जा रही है, तो इनमें से कुछ नहीं होता। फिर आपकी सैलरी कटती है। फिर आपकी नौकरी जाती है।
यह सब चीजें अब आप अंदाजा लगा लीजिए।
नहीं चाहिए लोकलुभावन वादों वाला बजट
सरकार के पास जो पैसा है, सरकार जो 35 परसेंट कैपेक्स बढ़ा रही है, वो अगर कैपिटल
एक्सपेंडिचर न करके, सरकार
लोकलुभावन वादों में, कुछ टैक्स
कम कर देती, कुछ और दूसरी चीजें पब्लिक को दे देती, तो लोगों की वाहवाही तो हो जाती, लेकिन इकॉनोमी का क्या होता? हमारे आपके बच्चों के
भविष्य का क्या होता ? मोदी इस
बारे में सोच रहे हैं कि कैसे भारतीय अर्थव्यवस्था को एक मजबूत धरातल पर खड़ा किया
जाए। आप इस बजट को इस रूप में देखिए।
मैं जब से यह बजट देख रहा हूं, पढ़ रहा हूं,
सुन रहा हूं, यह पहला
मौका है कि मोदी का बड़ा से बड़ा विरोधी भी इस बजट में कोई खामी नहीं निकाल पा रहा
है। आज का अखबार उठाकर देख लीजिए। टीवी चैनलों पर जो बहस हो रही है, विशेषज्ञ जो बोल रहे हैं, सोशल
मीडिया पर जो कमेंट आ रहे हैं,
जो लेख आ रहे हैं,
सब को देखिए। सब की यह राय है कि यह सही दिशा में उठाया गया कदम है। किसी को इस बात पर भरोसा नहीं हो रहा है कि एक
राजनैतिक दल अपने चुनावी सरोकार से कैसे इस तरह से अलग हो सकती है। वह कैसे चुनावी
फायदा उठाने के बारे में नहीं सोच सकती है। यही फर्क है दूसरे पौलिटिसियंस में और मोदी में। यह फर्क कैसे आया ? मोदी को यह भरोसा है कि लोगों को उन पर भरोसा है। उनको मालूम
है कि वे जो कदम उठाएंगे उसपर लोगों को विश्वास है कि उन्होंने सही के लिए वह कदम
उठाया है, देश और समाज के भले के लिए उठाया है।
मोदी की नीयत पर लोग आंख बंद करके भरोसा करते हैं। मोदी गलत हो सकते हैं। गलत कर सकते हैं। लेकिन
गलत नियत से कुछ नहीं कर सकते। ऐसा लोग मानने लगे हैं। और यह जो यकीन है वही आपको दिखाता है, 2014, 2017, 2019
के चुनाव नतीजों में।
लेकिन मैं एक और बात कह रहा हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने
इस बजट के जरिए उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा कर दी है।
उन्होंने इस बात की घोषणा कर दी है कि भारतीय जनता पार्टी बड़े मार्जिन से उत्तर
प्रदेश का चुनाव जीतने जा रही है। बिना इस आत्मविश्वास के यह बजट आ ही नहीं सकता
था। जब तक यह भरोसा नहीं होता कि उत्तर प्रदेश का चुनाव हम हर हालत में बड़े
पैमाने पर जीत रहे हैं, तब तक इस
तरह का बजट पेश करने की हिम्मत नहीं होती। या कहें कि जोखिम न लेते। लोगों की नजर
में यह जोखिम है। लेकिन मादी का विश्वास लोगों पर और अपनी अत्मक्षमता पर जो है
उसका नतीजा है यह बजट। तो उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव का नतीजा तो चुनाव
आयोग 10 मार्च को घोषित करेगा, प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी ने 1 फरवरी को घोषित कर दिया कि बीजेपी न तो चुनाव हार रही है, न तो उत्तर प्रदेश में मुश्किल में है। यह बजट इस बात की मुनादी कर
रहा है।
मोदी ने सात सालों में विकास की
राजनीति की मेनस्ट्रीमिंग कर दी
मोदी ने पिछले सात सालों में विकास की
राजनीति की। राजनीति की मेनस्ट्रीमिंग कर दी। उसको
मुख्यधारा में ले आए। अभी तक वह हासिए पर
थी। उसकी बात होती थी। उसकी चर्चा होती थी। लेकिन चुनाव आते ही पॉलिटिशियन उससे किनारा कर
लेते थे। विकास का जो मुद्दा है, उसे चुनाव के बाद देखेंगे।
मोदी ने कहा नहीं । बाद में नहीं देखेंगे। इसी मुद्दे पर चुनाव
लड़ेंगे। अपने काम के बल पर लड़ेंगे। जो काम किया है, उससे हमने
लोगों का भरोसा जीता है। और हमे भरोसा है
लोगों पर कि वे हमारी बात को समझेंगे कि हमने यह लोकलुभावन घोषणाएं नहीं किए हैं, तो यह
उनके हित में नहीं की है। उनके लौंग टर्म
इंटरेस्ट को हम सर्व कर रहे हैं। हम तात्कालिक राजनीतिक लाभ के लिए इस विमर्श को बदलना नहीं
चाहते।
मोदी ने 7 साल में
जाति अस्मिता की राजनीति की धार को भोथरा कर दिया है
मोदी ने 7 साल में
जाति अस्मिता की राजनीति की धार को भोथरा कर दिया है। उन्होंने एक नई स्मिता जो
लाभार्थियों की स्मिता है, उसका वर्ग तैयार किया है। उस वर्ग को मोदी पर भरोसा है। और मोदी को उस वर्ग पर भरोसा है। उसी भरोसे का नतीजा है यह बजट।
इंफ्रास्टक्चर और कैपिटल एक्सपेंडिचर में इतना बड़ा निवेश
पहली बार
फिसकल डेफिसिट की परवाह किए बगैर, इंफ्रास्टक्चर
और कैपिटल एक्सपेंडिचर के मामले में इतना
बड़ा निवेश पहली बार हो रहा है। और केवल केंद्र सरकार नहीं करने जा रही है। राज्यों
को भी तीन साल के लिए एक लख करोड को इंटरेस्ट फ्री लोन मिल रहा है कि वह इंफ्रास्ट्रक्चर
प्राजेक्ट पर निवेश करे।
इसके अलावा जो राज्यों का कैपिटल एक्सपेंडिचर होगा, राज्यों को केंद्र से पैसा मिलेगा, वह जब निवेश किया जाएगा तो इन सब
का एक मल्टीप्लायर इफेक्ट होगा। अंतरराष्ट्रीय भी कह रही हैं, एक्सपर्ट कर रहे हैं कि आने
वाला समय भारतीय अर्थव्यवस्था का समय होगा।
२०२५ तक ५ ट्रिलियन इकोनोमी की बात
हो रही है, हम उस दिशा में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। यह बजट उसको रफ्तार देगा। भारतीय अर्थव्यवस्था
को रफ्तार देगा। यह बजट भारतीय युवाओं के लिए एक नई सुबह की तरह आया है।
इस बजट को व्यापक दृष्टि से देखिए। छोटे मोटे लाभ के लिए इसे खारिज
मत कीजिए। मोदी की आप कुछ भी आलोचना कर सकते हैं मगर यह नहीं कह सकत कि उनको समस्या
नहीं समझ में आती। और वे समस्या को हल करने का प्रयास नहीं करते। सफलता असफलता बाद
की बात है। लेकिन समस्या समझ में आती है। उसका निदान समझ में आता है। उसका प्रयास
होता है। इस बजट को इसी नजरिए से देखिए।

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