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किसानों के अंदोलन ने स्‍थापित कर दिया कि मोदी ही हैं असल किसान नेता

 

Narendra Modi, PM
 

 

 

किसानों को यह दिख रहा है कि मोदी से पहले किसानों के लिए किसी नेता ने कुछ भी नहीं किया। देश का अधिकांश किसान मोदी सरकार के साथ खड़ा हो गया है। जाने अनजाने यह आंदोलन भाजपा को किसानों की पार्टी के रूप में स्‍थापित कर रहा है।  इस आंदोलन के कारण भाजपा को यह समझाने का अवसर मिल गया कि ये कानून किसानों के हित में एक बड़ा माइलस्‍टोन है, इसका प्रचार हो गया।

अगर यह फर्जी किसानों को आंदोलन का हंगामा न होता तो बहुत शांति से यह कानून लागू होजाता और आहिस्‍ता आहिस्‍ता लोगों को उसका लाभ भी पता चलता । मगर इस हंगामें ने जागरुकता बढ़ा दी कि यह कानून आखिर क्‍या है। ये तमाम कानून  एमएस स्‍वामीनाथन कमीशन के सिफारिशों के आधार पर बनाए गये हैं। इससे पूर्व ऐसे किसान नेता हुए जिनको अवसर मिला था, मगर उन्‍होंने कुछ नहीं किया।

 

स्‍वामीनाथन की सिफारिशें २००६ में यूपीए सरकार को सौंपी गयी

स्‍वयं एमएस स्‍वामीनाथन ने कहा है कि उनकी सिफारिशें २००६ में यूपीए सरकार में तबके कृषि मंत्री शरद पवार को सौंप दिया गया था। मगर उसपर काम हुआ २०१४ में जब नरेंद्र मोदी भारत के प्रधान मंत्री बने।

उन्‍होंने कहा कि राष्‍ट्रीय कृषि आयोग के सिफारिशों के मुताबि‍क उपज का न्‍यूनतम समर्थन मुल्‍य बढ़ाना, और उस बढ़े मुल्‍य पर सरकारी खरीद सुनिश्चित करना नरेंद्र मोदी सरकार की किसानों के हक में सफल कोशिश है।

२००६ से २०१४ तक राष्‍ट्रीय कृषि आयोग ने इस रिपोर्ट पर किसानों की हक में किसानों के अधिकार के लिए कोई काम नहीं हुआ, तब कृषि मंत्री थे शरद पवार। ये वही शरद पवार हैं जो महाराष्‍ट्र के राजीनति के सबसे बड़े नेता हैं। जो खुद को किसान नेता के रूप में स्‍थापित करते रहते हैं। ज्ञातव्‍य है कि इनके शानकाल में महाराष्‍ट्र में सबसे ज्‍यादा किसान प्रति साल आत्‍महत्‍या करते हैं। इनके शानकाल में देश के किसान सबसीडी, कर्जमाफी के बीच जूझता रहा। शरद पवार देश के सबसे लंबे काल तक देश के कृषि मंत्री रहे हैं। उनके समया किसान के आमदनी में काई बढोतरी नहीं हुयी।

किसान नेताओं में अबतक जो नाम चले आ रहे थे वे शरद पवार, राकेश टिकैत, चरहौनी, वही फलाना, वही ढमाका। मगर अब सब ध्‍वस्‍त हो रहे हैं। किसान नेताओं के रूप में उन लोगों की प्रामाणिकता पूरी तरह खत्‍म हो गयी है।

भले ही प्रोफेसर स्‍वामीनाथन ने शरद पवार का कहीं नाम नहीं लिया मगर उनकी बात से यह तो स्‍पष्‍ट है कि आखिर मोदी को ही क्‍यों यह शुभ काम करना पड़ा। किसकी वजह से करना पड़ा। उसमें शरद पवार का नाम सबसे उपर आता है।

 

असंभव सा लक्ष्‍य

जब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम किसानों की आमदनी दूना कर देंगे, तो लोगों ने कहा कि यह असंभव सा लक्ष्‍य है। आंकरों से खेलनेवालों ने कहा आप कृषि में आप १२ प्रतिशत से ज्‍यादा ग्रोथ कहां से लाओगे। किसानों की आमदनी दूना करना एक असंभव सा लक्ष्‍य है। मगर किसान इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

 

 

नरेंद्र मोदी ने किसानों का जीवन आसान किया

नरेंद्र मोदी ने ऐसी योजनाओं की शुरुआत की कि किसानों की मौलिक जरूरतें आसानी से हल होने लगे। उन्‍होंने किसानों को उस खांचे में फिट किया कि वे आमदनी की बढ़त की दौर में शामिल हो सकें । किसान के घर बिजली, पानी आ रही थी । रसोई का चुल्‍हा आ रहा था। गांव में सड़क बन रही थी। बाजारों में सरकारी क्रय केंद्र खुल रहे थे। किसानों के हित में नरेंद्र मोदी सरकार ने अनेकों ऐसे काम किए जिसे पहले के सभी सरकारें कर तो सकती थीं मगर किया नहीं।

नरेंद्र मोदी की सरकार ने स्‍वाइल हेथ कार्ड की योजना चालू की।  २२ करोड़ स्‍वाइल हेथ कार्ड बांटे जा चुके हैं। २०१४ से पूर्व कोई फसल बीमा योजना नहीं थी। आज लोगों को क्‍लेम मिल रहे हैं। प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना सबसे कम प्रिमियम में काम करती है। प्राधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना आई। माइक्रो इरिगेशन आया। भंडारन के लिए ग्रामीण भंडारण योजना बनी।

एलेक्‍ट्रोनिक नेशलन एग्रीकलचरल मारकेट बने।  ई नैम, राष्‍ट्रीय कृषि बाजार योजना लागू किया गया । देश में ५८५ मंडियों को जोड़ा गया। किसानो को जागरुक किया गया। जोत छोटी हो रही है। एफपीओ सिस्‍टम आज की जरूरत हैं। सरकार ने उसका भी मार्ग प्रसस्‍त किया।

अब बारी थी इन तीनों कानून को लगू करने की। सरकार ने अध्‍यादेश के मार्फत यह कानून लाया। बसके बाद वह संसद से स्विकृत हो गया और राष्ट्रपति ने हस्‍ताक्षर भी कर दिए। यह कानून पूरी तरह किसान हित में है यह ज्‍यादा लोगों को तब पता चला जब इसके विरुद्ध किसान आंदोलन के नाम पर हंगामा खड़ा किया गया।

किसानो का नेता सिर्फ मोदी हैं

नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। भाजपा का कद बढ़ता जा रहा है। भाजपा जो एक के बाद दूसरा राज्‍य जीत हरी है। यह इसका सबूत है। गुजरात में भाजपा ने लोकसभा चुनाव में छब्‍बीस के २६ सीट जीत गयी। बिहार तो पूरी तरह ग्रामीण है। उसका अस्‍सी प्रतिशत विधान सभा ग्रामीण है। उसमें भाजपा ने ४० में से ३९ लोकसभा सीटें जीत गयीं। यूपी में ६२ लोकसभा सीटें जीत गये।

अब ग्रामीण सहरी सब खत्‍म हो गया । सरकारी सबसिडी, सरकारी कर्जमाफी के जाल में फसे किसान को पक्‍का घर, बढियां सड़कें, बिजली, रसोई गैस का चुल्‍हा, अच्‍छा बीज, खाद पानी, ये सब मोदी ने दिया है।  

गांव हो या शहर दिन ब दिन आम लोगों का नरेंद्र मोदी  पर और भाजपा सरकारों पर भरोसा बढ़ता जा रहा है। नरेंद्र मोदी को किसानों ने लगातार दूसरी बार प्रधान मंत्री बनाया। मतलब साफ है कि किसान को बहुत अच्‍छे से पता है कि शरद पवार ने किसानों के भले के लिए कोई काम नहीं किया। सारा काम मोदी ने किया।

यह फर्जी किसान आंदोलन लंडन और ओंटेरियो में हो रहे हैं वाशिंगटन में गांधी की मूर्ति को भी छतिग्रस्‍त किया गया। इस आंदोलन से अनेक गंदगी बाहर आयी है।

 

ज्‍यादातर किसान देश के साथ खड़ा है। और जाने अंजाने यह आंदोलन भाजपा को किसानों की पार्टी के तौर पर स्‍थापित कर रहा है। भाजपा को यह अवसर मिल गया कि यह अब सबको दिख रहा है कि किसानो की पार्टी भाझपा और किसानों का नेता नरेंद्र मोदी हैं। अब यह और भी स्‍पष्‍ट हो गया कि किसानो का नेता सिर्फ मोदी हैं।

 

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