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देश की जनता नरेंद्र मोदी के साथ और राष्‍ट्रविरोधी तकतें आंदोलनकारियों के साथ

 

PM Nanendra Modi


 

किसान आंदोलनकारी और सरकार के बीच जो कश्‍मकश चल रही है उसमें आंदोलनकारियों ने कुछ विंदुओं पर विरोध जताया है।

विरोध के विंदु १. एमएसपी पर फसल बेचने का विकल्‍प खत्‍म हो जाएगा। यह उनकी आशंका है।

सरकार का पक्ष: सरकार का आश्वासन है कि यह खत्‍म नहीं होगा।

विरोध के विंदु २. मंडी समीतियां कमजोर हो जाएंगी। और किसान निजी मंडियों के चंगुल में फंस जाएंगे।

सरकार का पक्ष: राज्‍य सरकारें निजी मंडियों के रजिस्‍ट्रेशन की व्‍यवस्‍था लागू कर सकती हैं। शुल्‍क की दरों में भी समानता की जा सकती है।

विरोध के विंदु ३. मंडियों के बाहर कारोबार करने वालों पर अंकुष न होने से किसानों से धोखा हो सकता है।

सरकार का पक्ष: ऐसे लोगों के पंजीकरण का नियम बनाने की शक्तियां राज्‍यों को दी जा सकती हैं।  राज्‍य सरकारें किसानो के हित में नियम बना सकती हैं।

विरोध के विंदु ४. विवादों के निपटारे के लिए किसानों को सिविल कोर्ट में अपील का अधिकार नहीं दिया गया है।

सरकार का पक्ष: किसानों के विवादों के सुनवाई के लिए एसडीएम की जगह सिविल अदालतों में कराने का विकल्‍प भी दिया जा सकता है।

विरोध के विंदु ५. कांट्रेक्‍ट फार्मिंग का रजिस्‍ट्रेशन किया जाय।

सरकार का पक्ष: रजिस्‍ट्रेशन के लिए राज्‍य प्रबंध कर सकते हैं।

विरोध के विंदु ६. किसानों की जमीन पर उद्योगपतियों का कब्‍जा हो जाएगा।

सरकार का पक्ष: किसानों की जमीन पर किसी का मालिकाना हक नहीं हो सकता।  जमीन किसी भी हाल में बंधक नहीं रखी जा सकती।

विरोध के विंदु ७. किसानों की भूमि की कुर्की हो सकती है।

सरकार का पक्ष: यह आशंका ही निर्मूल है।

विरोध के विंदु ८. बिजली संशोधन विधेयक २०२० खत्‍म किया जाय।

सरकार का पक्ष: किसानों की बिजली बिल के भुगतान की वर्तमान व्‍यवस्‍था में कोई परिवर्तन नहीं होगा।

विरोध के विंदु ९. एयर क्‍वालिटी मैनेजमेंट ऑफ एनसीआर ऑर्डिनेंस २०२० खतम किया जाय।

सरकार का पक्ष: एयर क्‍वालिटी मैनेजमेंट ऑफ एनसीआर ऑर्डिनेंस २०२० के अंतर्गत पराली जलाने से संवंधित किसानो की आपत्तियों का समुचित समाधान कर दिया जएगा।

 

सरकार ने कल लिखित में यह सब प्रस्‍ताव भेजे, ताकि इनकी संकाओं का समाधान किया जा सके। लेकिन इन्‍होंने आउटसाइडली सरकार द्वारा दिए गये आस्‍वासन को खारिज  कर दिया। इन्‍होंने कहा कि हम आंदोलन को और तेज करेंगे।

 

वे दिल्‍ली जयपुर, दिल्‍ली हावरा, दिल्‍ली लखनउ हाईवे जाम करेंगे। भाजपा नेताओं का बाइकॉट करेंगे। अंबानी और अडानी के उत्‍पादों का वहिस्‍कार करेंगे। शनिवार को पूरे देश के टॉल प्‍लाजा को कब्‍जे में ले लेंगे। देश में अराजकता का वातावरण पैदा करते हुए फ्री आवाजाही शुरू करेंगे।

 

 

मनमोहन सिंह काल और नरेंद्र मोदी काल में एमएसपी में अंतर

एक नजर डालते हैं कि २०१३-१४ में जब मनमोहन सिंह की सरकार थी और २०१९-२० जब नरेंद्र मोदी की सरकार है, उस दोनो कालों में एमएसपी में क्‍या अंतर आया है।

 

२०१३-१४ में गेहूं की एमएसपी थी १४०० रुपये प्रति क्विंटल जो अब है १९७५ रुपये प्रति क्विंटल। इसमें ४१ प्रतिशत की बढ़ोत्‍तरी हुयी।

 

२०१३-१४ में धान की एमएसपी थी १३१० रुपये प्रति क्विंटल जो अब है १८६८ रुपये प्रति क्विंटल। इसमें ४३ प्रतिशत की बढ़ोत्‍तरी हुयी।

 

२०१३-१४ में मसूर की एमएसपी थी २९५० रुपये प्रति क्विंटल जो अब है ५१०० रुपये प्रति क्विंटल। इसमें ७३ प्रतिशत की बढ़ोत्‍तरी हुयी।

२०१३-१४ में उड़द की एमएसपी थी ४३०० रुपये प्रति क्विंटल जो अब है ६००० रुपये प्रति क्विंटल। इसमें ४० प्रतिशत की बढ़ोत्‍तरी हुयी।

 

२०१३-१४ में मूंग की एमएसपी थी ४५०० रुपये प्रति क्विंटल जो अब है ७२०० रुपये प्रति क्विंटल। इसमें ६० प्रतिशत की बढ़ोत्‍तरी हुयी।

२०१३-१४ में अरहड़ की एमएसपी थी ४३०० रुपये प्रति क्विंटल जो अब है ६००० रुपये प्रति क्विंटल। इसमें ४० प्रतिशत की बढ़ोत्‍तरी हुयी।

 

२०१३-१४ में सरसों की एमएसपी थी ३०५० रुपये प्रति क्विंटल जो अब है ४६५० रुपये प्रति क्विंटल। इसमें ५२ प्रतिशत की बढ़ोत्‍तरी हुयी।

२०१३-१४ में चना की एमएसपी थी ३१००रुपये प्रति क्विंटल जो अब है ५१०० रुपये प्रति क्विंटल। इसमें ६५ प्रतिशत की बढ़ोत्‍तरी हुयी।

 

अब आप क्‍या कहेंगे? एमएसपी बढ़ रही है। किसानो को लाभ हो रहा है। फिर भी आंदोलनकारियों ने सरकार के प्रस्‍ताव क्‍यों ठुकराए हैं?

 

वे कह रहे हैं कि आंदोलन को और तेज करेंगे। दिल्‍ली की जो सड़कें खुली हुयी है उसे भी बंद करेंगे। इन्‍होंने अपनी तरफ से बातचीत का रास्‍ता बंद कर दिया है।

 

सरकार ने अबतक इन फर्जी किसानों से ६ दौर की बातचीत की है। ५ बार कें‍द्रीय कृषि मंत्री ने और एक बार कें‍द्रीय गृह मंत्री ने।

 

सरकार ने कहा कि आपकी आशंकाएं निर्मूल हैं। वे कह रहे हैं कि हमें लिखित में आस्‍वासन दिया जाय । सरकार उसके लिए भी तैयार है।

 

आंदोलनकारी अभी भी ये कहते हैं तीनों कानून को वापस लीजिए

लेकिन आंदोलनकारी सरकार की बात नहीं मानने को तैयार हैं। क्‍योंकि ये कहीं और से संचालित हैं। अभी भी ये कहते हैं इन तीनों कानून को वापस लीजिए।

 

यह आंदोलन व्‍यापक किसानों के हित के विरुद्ध एक छोटे से वर्ग के पक्ष में है। इसमें राष्‍ट्र विरोधी ताकतों की घुसपैठ है। ये पंजाब हरियाना पूर्वी उत्‍तर प्रदेश और महाराष्‍ट्र के कुछ इलाके तक सिमित है। जो मंडी समीतियों पर काबिज हैं। ये बिचौलिया हैं ये कमीशनखोड़ हैं। इन्‍होंने ही तो किसान को लूटा है। ये आंदोलनकारी कठपुतली हैं। ये शाहीन बाग २ की तैयारी में हैं। यह स्‍पष्‍ट है कि यह फर्जी किसान आंदोलन राजनीति से प्ररित है। यह स्‍पष्‍ट हो गया है कि आम लोग और आम किसान मोदी के साथ हैं।

हाल के चुनावों ने यह झलक दिखा दिया है। बिहार, यूपी, मध्‍य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, मनिपुर, उत्‍तराखंड, आदि जितने राज्‍यों में उपचुनाव हुए हैं, उनके नतीजे भाजपा के पक्ष में आए हैं।

अभी राजस्‍थान में ४ चरणों में जो पंचायत समीतियों और जिला परिषदों के चुनाव हुए हैं, वह बताते हैं कि देश की जनता और खास कर ग्रामीण जनता नरेंद्र मोदी के साथ हैं।

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